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ब्रिक्स के लिए चीन ने यूं ही नहीं किया भारत का समर्थन, जानें भारत ने कैसे दबा रखी थी ड्रैगन की कमजोर नस

​India China News : एक तरफ भारत का अटल इरादा तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में चीन की किरकिरी। ऐसे में ड्रैगन का मनोबल ही टूट गया। अमेरिका, फ्रांस, जापान के साथ भारत के क्वाड ने अपना दमखम दिखाया तो जो बाइडेन के नए अमेरिकी प्रशासन की भी चीन को लेकर सख्ती ने उसे (चीन को) कहीं का नहीं छोड़ा।

Xi-Modi

शी जिनपिंग और नरेंद्र मोदी।

हाइलाइट्स:

  • चीन ने ब्रिक्स सम्मेलन के आयोजन के लिए भारत का समर्थन कर चौंका दिया है
  • इससे पहले ड्रैगन वादे के मुताबिक पूर्वी लद्दाख में अपने सैनिकों को पीछे ले गया
  • भारत भी चीनी कंपनियों के भारत में निवेश की योजनाओं को भी मंजूरी देने लगा है

नई दिल्ली

11 महीनों तक पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अकड़ दिखाने वाला चीन जब भारत के चट्टानी इरादे को भांप गया तो न केवल सीमा से उलटे पांव लौटने को तैयार हो गया बल्कि अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का समर्थन भी करने लगा है। जी हां, चीन ने भारत में ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन के आयोजन का समर्थन किया है। हैरत की बात है कि सीमा पर उत्पात मचाकर उल्टे भारत पर ठीकरा फोड़ते रहने वाला ड्रैगन अब मानवता की भी बात करने लगा है।



चीनी विदेश मंत्रालय ने भारत के समर्थन में क्या कहा


चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता वांग वेनबिन ने कहा, “भारत के इस साल ब्रिक्‍स सम्‍मेलन का आयोजन का चीन समर्थन करता है। (चीन) भारत समेत अन्‍य ब्रिक्‍स देशों के साथ विभिन्‍न क्षेत्रों में संवाद और सहयोग बढ़ाना चाहता है। अर्थव्‍यवस्‍था, राजनीति और मानवता के ‘तीन पहियों वाली पहल’ को भी मजबूत करना चाहता है।” भारत को इस वर्ष के लिए ब्रिक्‍स समिट (BRICS Summit) की अध्‍यक्षता मिली है।

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यूं ही नहीं बदला चीन का मिजाज


दरअसल, चीन का यह बदला हुआ मिजाज उसकी फितरत के मुताबिक नहीं है, बल्कि भारत की सीमा पर हुई उसकी अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती ने उसे अपना रवैया फौरी तौर पर बदलने को मजबूर किया है। 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत ने चीन के प्रति अपने रवैये में ऐतिहासिक बदलाव लाते हुए उसे जबर्दस्त आर्थिक नुकसान पहुंचाया। कई चीनी कंपनियों को भारतीय परियोजनाओं से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। साथ ही, भारत सरकार ने चीन के सैकड़ों मशहूर मोबाइल ऐप्स को भी प्रतिबंधित कर दिया। इन वजहों से भारत-चीन के व्यापारिक रिश्ते निचले स्तर पर आ गए।



भारत के फौलादी इरादों ने चीन को किया मजबूर


इतना ही नहीं, भारत ने साफ कर दिया कि वो सीमा पर तब तक चीन का मुकाबला करेगा जब तक चीनी सैनिक पीछे नहीं हट जाते। भारतीय सैनिकों ने पैंगोंग घाटी में ऐसी रणनीतिक चोटियों पर कब्जा कर लिया जहां से पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की हरेक गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। जब चीन ने सर्दियों में भी अपने सैनिक वापस नहीं बुलाने का फैसला किया तो भारत ने जवाब में इलाके में अपने सैनिकों की संख्या करीब तीन गुना बढ़ा दी। इसके साथ ही, टैंकों, मिसाइलों समेत तमाम घातक हथियारों को भी सीमा पर तैनात कर दिया। भारत अप्रैल महीने में चीन की आक्रामकता के जवाब में तुरंत हजारों की संख्या में सैनिकों और हथियारों को भेजकर चीन को हैरान कर ही चुका था।

भारत-चीनः सुधर रहे हैं हालात

झुका चीन तो भारत ने भी दिखाई नरमी


एक तरफ भारत का अटल इरादा तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में चीन की किरकिरी। ऐसे में ड्रैगन का मनोबल ही टूट गया। अमेरिका, फ्रांस, जापान के साथ भारत के क्वाड ने अपना दमखम दिखाया तो जो बाइडेन के नए अमेरिकी प्रशासन की भी चीन को लेकर सख्ती ने उसे (चीन को) कहीं का नहीं छोड़ा। रही सही कसर कोरोना काल में चीनी अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान ने पूरी कर दी। मंद पड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चीन को हर हाल में भारत जैसे बड़े वैश्विक बाजार को वापस पाने की मजबूरी है। इन्हीं सब वजहों से चीन ने समझौते के तहत अपने सैनिकों को पूर्वी लद्दाख के संघर्ष वाले बिंदुओं से हटाने पर रजामंदी दी और तुरंत अपने वादे पर खरा भी उतर गया।



चीन से FDI को मिलने लगी मंजूरी


जवाब में भारत ने भी चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने की शुरुआत कर दी। खबर है कि चीन की ओर से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के प्रस्तावों को मंजूरी का पिछले नौ महीनों से रुका हुआ सिलसिला दोबारा शुरू हो गया है। हालांकि अभी केवल छोटे मामले ही मंजूर हो रहे हैं। पिछले साल अप्रैल में एफडीआई के कानूनों में संशोधन करते हुए चीनी निवेश से जुड़े प्रस्तावों के लिए ऑटोमेटिक रूट के बजाय अप्रूवल रूट का प्रावधान कर दिया गया था। हाल के वर्षों में प्रत्यक्ष चीनी निवेश के आंकड़े तेजी से बढ़ रहे थे। संभवतः चीन समझ चुका है कि भारत को आंख दिखाना किसी भी दृष्टि से उसके हित में नहीं है।

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Web Title : why and how china supported india for brics summit, here is the predominant build off of altering temper of dragon

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